रविवार से प्रारंभ होने वाले नवरात्रि व्रत की कुछ विशेष सावधानियां –
१-अमावस्या को ही सारी पूजन सामग्री एकत्रित कर लें ।
२- अमावस्या को केवल एक बार ही दोपहर के पूर्व भोजन ग्रहण कर लें।
३- प्रतिपदा को पूजन के निमित्त आचार्य का पूजन देवीपूजन के पूर्व सुनिश्चित कर लें।
४-भगवती की प्रतिमा या फोटो रखे।
५-पूजन करने के पूर्व नवरात्रि व्रत एवम देवी पूजन के लिए भगवती जगदम्बा से सहयता के लिए प्रार्थना कर ले ।
६-यथोचित सभी उपचारों से देवी पूजन सुनिश्चित कर ले
७-होम के लिए त्रिकोण कुंड का निर्माण सुनिश्चित कर ले।
८- प्रतिदिन एक कुमारी का पूजन करें या अष्टमी अथवा नवमी को नौ कुमारीकन्याओं का पूजन करें ।
९–कन्या पूजन में दो वर्ष से दस वर्ष की कन्याओं को ही पूजन में रखना सुनिश्चित करे।
१०-समस्त कार्यों की सिद्धि के लिए ब्राह्मण कन्या ,विजय प्राप्ति के लिए क्षत्रिय कन्या ,धन लाभ के लिए वैश्य या शुद्र वर्ण की कन्याओं का पूजन करना चाहिए ।
११-देवी उपासना में सभी वर्णों को कुमारी कन्या का पूजन करना चाहिए ।
१२- अष्टमी को देवी पूजन विशेष प्रकार से संपन्न करना चाहिए ।
१३- जो नौ दिन व्रत न रह सके उनके लिए अंतिम तीन दिवस अष्टमी व्रत का विधान है ।
१४- देवी पूजन लाल चंदन मिश्रित बेल पत्र से करना चाहिए।
१५- नवरात्रि पूजन में होने वाली हवन में प्रयुक्त नवार्ण मन्त्र से ही हवन करना है।चुकी इसी मंत्र से आहुति देने से देवी को संतुष्टि होती है ।
१६- देवी पूजन के उपरांत शिव पूजन की अनिवार्यता सुनिश्चित है ऐसा न होने पर भगवती जगदम्बा स्वयं ही उस पूजन को भस्म कर देती हैं !!
प्रमाण
श्रीमददेवीभागवत महापुराण

Author: janhitvoice

