बख्तियारपुर/पटना से बड़ी खबर रावण वध कार्यक्रम में उमड़ा जनसैलाब, प्रशासन की चाक-चौबंद सुरक्षा में संपन्न हुआ आयोजन
बख्तियारपुर/पटना (बिहार)। दशहरा के अवसर पर श्रीराम मंदिर के संयोजन में इस वर्ष भी परंपरागत रावण वध का भव्य आयोजन किया गया। बरसात के मौसम के बावजूद हजारों की संख्या में दर्शक कार्यक्रम में शामिल हुए और रावण दहन का साक्षी बने।
पूजा-अर्चना की विधिवत प्रक्रिया पूरी करने के बाद मुख्य पुजारी अरविन्द कुमार पाण्डेय ने श्रीराम का प्रतीकात्मक तीर चलाया, जो रावण के नाभि में लगा और देखते ही देखते रावण का पुतला जल उठा। पूरा मैदान “जय श्रीराम” के उद्घोष से गूंज उठा।
कार्यक्रम का धार्मिक महत्व
आयोजन समिति ने बताया कि यह कार्यक्रम असत्य पर सत्य की विजय और अधर्म पर धर्म की स्थापना का संदेश देता है। परंपरा के अनुसार, भगवान श्रीराम ने दशमी के दिन रावण का वध किया था, तभी से विजयादशमी पर रावण वध का आयोजन होता आ रहा है।
मुख्य पुजारी ने कहा –
भगवान श्रीराम की विजय की कहानी हमें सिखाती है कि सत्य और न्याय की जीत हमेशा होती है। यह आयोजन आने वाली पीढ़ियों को मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के आदर्शों से जोड़ने का प्रयास है।
प्रशासन की सख्त निगरानी
कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए प्रशासन ने सुरक्षा और शांति व्यवस्था की पूरी जिम्मेदारी संभाली।
बीडीओ अशोक प्रसाद ने बताया कि कार्यक्रम स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता थी और भीड़ नियंत्रण के लिए विशेष इंतजाम किए गए थे।
सीओ निरंजन सुमन ने कहा कि यह आयोजन न केवल धार्मिक महत्व का है, बल्कि समाज को असत्य पर सत्य की विजय का संदेश भी देता है।
थानाध्यक्ष देवानंद शर्मा ने बताया कि हजारों की भीड़ के बावजूद सुरक्षा व्यवस्था की मजबूती के कारण कोई अप्रिय घटना नहीं हुई।
इसके अलावा अग्नि शमन दल, चिकित्सा कर्मी और आयोजन समिति के सदस्य भी मुस्तैदी से मौजूद रहे।
माहौल उत्सव जैसा
रावण दहन के क्षण में दर्शकों में अपार उत्साह देखने को मिला। भीड़ ने मोबाइल फोन और कैमरों से इस ऐतिहासिक पल को कैद किया। आयोजन स्थल पर मेले जैसा माहौल रहा, बच्चों और परिवारों ने पूरे आनंद के साथ दशहरा पर्व मनाया।
इस तरह बख्तियारपुर में रावण वध का यह पारंपरिक कार्यक्रम न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि प्रशासन और समिति की समन्वित व्यवस्था के कारण पूरी तरह शांतिपूर्ण और सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
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Author: janhitvoice











