
गुजरात प्रांत के सूरत में मध्य देशीय वैश्य महा सभा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक आज संपन्न हुई।
बैठक में आए बिहार के एक प्रतिनिधि ने बताया कि अभी पूरे भारतवर्ष में मध्यदेशीय वैश्य समाज का राष्ट्रीय स्तर का एकमात्र रजिस्टर्ड संगठन है- मध्य देशीय वैश्य महासभा (MVMS)। जिसका पंजीकरण संख्या है 3026 ( 2022) । कानू हलवाई एवं इससे मिलते जुलते विभिन्न उपजातियो के समूह का प्रतिनिधित्व करती है “मध्यदेशीय वैश्य महासभा”।
मद्धेशिया समाज की कहानी – राजेश मद्धेशिया की जुबानी । आइए जानते हैं आगे –
मध्यदेशीय वैश्य महासभा पंजीयन संख्या – S-3026/2022 हमारा वर्तमान गौरव । गौरव शब्द इसलिए प्रयुक्त करना पड रहा है क्योंकि इसी नाम ने वर्ष 1995 के बाद एक बार फिर से हमे स्वजातीय परिवार के बीच सर उठाकर चलने और एक वैध संस्था के साथ सामाजिक विकास के लिए आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त किया है ।
“अखिल भारतीय मध्यदेशीय वैश्य महा सभा” के बाद वर्ष 1995 में आदरणीय श्री विमल कुमार साव द्वारा अखिल भारतीय मध्यदेशीय वैश्य सभा के नाम और पंजीयन संख्या S-27613 के नाम से दुबारा नया राष्ट्रीय पंजीयन कराकर समाज को सौप दिया । तब से झारखंड स्थित देवघर राष्ट्रीय चुनाव वर्ष 2021 तक उक्त संगठन का नवीनीकरण कराया ही नही जा सका तथा तब तक इसी नाम से चंदा उगाही व धन संग्रह कर सांगठनिक कार्य किया जाता रहा जो की नियमतः अवैध और गैर कानूनी था क्योंकि सोसायटी एक्ट के मुताबिक हर तीन वर्ष में संस्था का नवीनीकारण कराना ही चाहिए लेकिन उक्त संस्था नवीनीकृत न होने से मृतप्राय/अवैध रूप में ही कार्य करती चली आ रही थी । शायद अनवीनीकृत होने का दुष्परिणाम ही था कि उक्त संस्था के नाम पर कोई भी स्वयंभू राष्ट्रीय पदाधिकारी घोषित हो हमारे स्वजातीय बंधुओं को राष्ट्रीय धरोहरों और सामाजिक विकास के नाम पर दोहन करने में लगा रहा या यूं कहें की समाज के मात्र 5% लोग 95% लोगो पर प्रभावी रहते हुए मनमानी करते रहे । न संस्था का नवीनीकरण न संस्था का कोई पंजीकृत लोगो ( प्रतीक चिन्ह ) जिसे लगा कर सामाजिक कार्य और धन उगाही किया जा रहा था । क्या ऐसे किसी भी लोगो ( संस्था का प्रतीक चिन्ह) को लगाने का विधिक अधिकार था ?
वर्ष 2021 के देवघर राष्ट्रीय चुनाव में राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद पर विजय प्राप्त कर निर्वाचित होने के बाद ही डॉ विजय कुमार गुप्ता ने भी तब असलियत जाना कि उक्त संस्था जिसके राष्ट्रीय अध्यक्ष वे चुने गए हैं वास्तव में वैध है ही नही । न संस्था नवीनीकृत है न ही उसका Logo पंजीकृत है । तब उक्त संस्था के तत्कालीन निर्वाचित राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ विजय कुमार गुप्ता ने भारत, नेपाल और बांग्ला देश के सभी राष्ट्रीय व प्रांतीय कार्यसमिति के सुझाव और सहयोग से अविवादित नए राष्ट्रीय पंजीयन का निर्णय लिया और दिसंबर 2022 में “मध्देशीय वैश्य महासभा” के नाम से नया राष्ट्रीय पंजीयन करा लिया जिसका पंजीयन क्रमांक S-3026/2022 है ।
चूंकि हम सभी पूर्ण शासकीय नियमो का परिपालन करते हुए स्वजातीय समाज को एक वैध संस्था देना चाहते थे ताकि हमारे उत्तराधिकारी फिर से असली और फर्जी संगठन के आरोपो में घिर कर किसी के प्रश्न बिंदु पर सर झुकाकर नही सर उठाकर उत्तर दे सकें । संगठन से संबंधित दस्तावेज जिस प्लेटफार्म पर चाहें वहीं उपलब्ध करा सकें ।
पूर्व संगठन अखिल भारतीय मध्य देशी वैश्य सभा की अवैधता के कारण ही माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ विजय कुमार गुप्ता जी की प्रेरणा से मध्यदेशीय वैश्य महासभा का नया पंजीयन कराना पड़ा और अब बहुत जल्द हमारा पंजीकृत लोगो भी ट्रेडमार्क हो कर आप सबके सामने है ।
आप सभी को हार्दिक शुभकामना प्रेषित करते हुए आश्वस्त करते हैं की आप सभी के स्नेहिल सहयोग से हम उत्तरोत्तर अपने लक्ष्य की ओर अग्रसर होते रहेंगे । गति भले ही कछुआ की हो पर जीत भी सुनिश्चित है ।
राजेश मद्धेशिया ( राष्ट्रीय महामंत्री कार्यालय)
मध्यदेशीय वैश्य महासभा